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गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक घरेलू उपचार खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से
कचà¥à¤šà¤¾ पपीता: à¤à¤¾à¤°à¤¤, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨, शà¥à¤°à¥€à¤²à¤‚का, बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ आदि कई देशों में, कचà¥à¤šà¥‡ पपीते का उपयोग पारंपरिक रूप से गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ और गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§ के लिठलोक उपचार के रूप में किया जाता है। इसका सेवन अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में करने पर यह कारगर होता है। हरे पपीते में लेटेकà¥à¤¸ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गरà¥à¤ में संकà¥à¤šà¤¨ पैदा करती है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होता है।
पारà¥à¤¸à¥à¤²à¥€ (अजमोद): अजमोद के बीज या पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बने तेल में गाà¥à¤¾ à¤à¤ªà¤¿à¤“ल होता है, यह à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ पदारà¥à¤¥ है जिसे बड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में सेवन करने से जहरीला साबित हो सकता है। अनà¥à¤¸à¤‚धान के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अजमोद में पाठजानेवाले à¤à¤ªà¤¿à¤¯à¥‹à¤² विष गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का कारण बन सकती है और इस विष के गंà¤à¥€à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल और घातक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकते हैं। मिरिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•िन अजमोद में पाया जाने वाला à¤à¤• यौगिक है। à¤à¤ªà¤¿à¤“ल की तरह मिरिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•िन, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ कर सकता है और गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की वजह बन सकता है।
अननà¥à¤¨à¤¾à¤¸: कà¥à¤› अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से पता चला है कि अनानास में बà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤²à¥ˆà¤¨ होता है, यह रसायन गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के ऊतकों को नरम बनाता है और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ का कारण बनता है, जिससे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होता है।
मेथी के बीज: मेथी का बीज à¤à¤• पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ मसाला है जिसका उपयोग à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कई वà¥à¤¯à¤‚जनों में सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और सà¥à¤—ंध बढ़ाने के लिठकिया जाता है। इसमें सैपोनिन होता है, à¤à¤• रसायन जो ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के समान काम करता है। यह गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ का कारण बन सकता है, और इस तरह यह गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है।
करेला: यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सबà¥à¤œà¥€ है जो हर जगह पाई जाती है और à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कई संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लाà¤à¥‹à¤‚ के लिठकरेले का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। कà¥à¤› लोगों का मानना है कि अगर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन किया जाठतो करेले से गरà¥à¤ संकà¥à¤šà¤¨ हो सकता है जिससे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है।
तिल के बीज: अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में सेवन करने पर तिल के बीज हानिकारक हो सकते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ का कारण बनते हैं जिससे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहली तिमाही में खतरनाक माना जाता है।
बैंगन: बैंगन का अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• सेवन गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठअसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जाता है। इसमें फाइटोहारà¥à¤®à¥‹à¤¨ होते हैं जो गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ घटा सकते हैं। इसलिà¤, गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठबैंगन à¤à¤• सहायक पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपचार हो सकता है।
à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾: जब à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² खाने में किया जाता है तो इसे हानिकारक माना जाता है। यह गरà¥à¤ से रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ का कारण बनता है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है।
चीज़ (पनीर): कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार के चीज़, जैसे कैमेमà¥à¤¬à¤°à¥à¤Ÿ, बà¥à¤°à¥€, शेवर, गोरगोनà¥à¤œà¤¼à¥‹à¤²à¤¾ और डेनिश बà¥à¤²à¥‚, बनाने में à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का मोलà¥à¤¡, यानी फफूंद का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है, और इसमें लिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾) हो सकता है जो गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का कारण बन सकता है। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है और तà¤à¥€ होती है अगर लिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ यà¥à¤•à¥à¤¤ नरम पके हà¥à¤ या अनपसà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤‡à¥›à¤¡ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का सेवन किया जाता है।
कैफ़ीन: यह कई खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में पाया जाता है, जैसे कि कॉफी, कà¥à¤› ऊरà¥à¤œà¤¾ पेय (à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क)। बहà¥à¤¤ अधिक कैफीन (२०० मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ से अधिक) का सेवन गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के जोखिम को बढ़ा सकता है।
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